कल्याण भव: संस्थान
धन प्राप्ति के लिए करे ये उपाय कभी नहीं रहेगी धन की कमी
धन हर किसी के जीवन व्यापन करने के लिए सबसे जरुरी साधन होता है और हर
कोई धन कमाता भी है, पर सिर्फ अपनी दैनिक जरूरते पूरी करने के लिए अगर उन
दैनकी जरूरते के अलावा अगर आप कुछ और सपने पुरे करना चाहते है तो आपको और
कमाने की आवशयकता होती है जो की इतना आसान नहीं है क्युकी आज के दौर में
अपनी जरूरते पूरी करने के लिए कामना ही मुश्किल है तो उन सब के साथ
एक्स्ट्रा जरूरते पूरी करना थोड़ा मुशिकल है. पर आज हम आपको कुछ ऐसे उपाय
बताने जा रहे है जो आपके उसी आसान से नौकरी में आपको और ज्यादा धनवान बना
सकते है, और अगर आप इन्हे अपने डेली के नियम में ले आये तो आपको कभी धन की
कमी नहीं होगी।
धन प्राप्त करने के लिए उपाय:
1.गुरूवार के दिन का स्वामी देव गुरू बृहस्पति को माना गया है। गुरू
धर्म और धन के स्वामी ग्रह हैं। धन संबंधी परेशानी दूर करने के लिए हर
गुरूवार के दिन किसी सुहागन स्त्री को सुहाग सामग्री दान करें।
2.अपनी आदत में इस बात को शामिल करें कि जब भी कहीं से घर वापस लौटकर
आएं तो कुछ भी साथ में लेकर जरुर आएं। खाली हाथ घर बिल्कुल भी नहीं आएं।
3.धन लक्ष्मी की वृद्घि के लिए सोमवार या फिर शुक्रवार के दिन सफेद
वस्तुओं का दान करें। सफेद वस्तु दूध, चीनी, सफेद वस्त्र कुछ भी हो सकता
है।
4.काली हल्दी को नकारात्मक शक्तियों को दूर करने वाला माना गया है। किसी
भी दिन एक काली हल्दी लाकर पूजा स्थान में रखें। नियमित इसे धूप दीप
दिखाएं। जब भी कभी धन संबंधी काम से कहीं जाएं तो इसके दर्शन करलें।
5.हर दिन काम पर जाते से कुछ धन कहीं छुपा कर रख दें। जब शाम को घर
लौटें तो इस धन को किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दान कर दें। शनिवार के दिन
किसी सफाइकर्मी को दान देने से भी आर्थिक बाधाएं दूर होती है।
6.शीघ्र धन प्राप्ति के लिए
“ॐ नमः कर घोर-रुपिणि स्वाहा”
विधिः उक्त मन्त्र का जप प्रातः ११ माला नित्य पूजन स्थान पर करे।
7.शुक्रवार को सवा सौ ग्राम साबुत बासमती चावल और सवा सौ ग्राम ही
मिश्री को एक सफेद रुमाल में बांध कर माँ लक्ष्मी से अपनी गलतियों की क्षमा
मांगते हुए उनसे अपने घर में स्थायी रूप से रहने की प्रार्थना करते हुए
उसे नदी की बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें , धीरे धीरे आर्थिक पक्ष मजबूत
होता जायेगा ।
8.घर के पूजा स्थल और तिजोरी में सदैव लाल कपडा बिछा कर रखें और संध्या
में आपकी पत्नी या घर की कोई भी स्त्री नियम पूर्वक वहां पर ३ अगरबत्ती जला
कर अवश्य ही पूजा करें ।
9.घर में तुलसी का पौधा लगाकर वहां पर संध्या के समय रोजाना घी का दीपक जलाने से माता लक्ष्मी उस घर से कभी भी नहीं जाती है ।
10.काले तिल परिवार के सभी सदस्यों के सिर पर सात बार उसार कर घर के उत्तर दिशा में फेंक दें, धनहानि बंद होगी।
धन प्राप्ति के लिए करे ये उपाय कभी नहीं रहेगी धन की कमी
धन हर किसी के जीवन व्यापन करने के लिए सबसे जरुरी साधन होता है और हर कोई धन कमाता भी है, पर सिर्फ अपनी दैनिक जरूरते पूरी करने के लिए अगर उन दैनकी जरूरते के अलावा अगर आप कुछ और सपने पुरे करना चाहते है तो आपको और कमाने की आवशयकता होती है जो की इतना आसान नहीं है क्युकी आज के दौर में अपनी जरूरते पूरी करने के लिए कामना ही मुश्किल है तो उन सब के साथ एक्स्ट्रा जरूरते पूरी करना थोड़ा मुशिकल है. पर आज हम आपको कुछ ऐसे उपाय बताने जा रहे है जो आपके उसी आसान से नौकरी में आपको और ज्यादा धनवान बना सकते है, और अगर आप इन्हे अपने डेली के नियम में ले आये तो आपको कभी धन की कमी नहीं होगी।धन प्राप्त करने के लिए उपाय:
1.गुरूवार के दिन का स्वामी देव गुरू बृहस्पति को माना गया है। गुरू धर्म और धन के स्वामी ग्रह हैं। धन संबंधी परेशानी दूर करने के लिए हर गुरूवार के दिन किसी सुहागन स्त्री को सुहाग सामग्री दान करें।
2.अपनी आदत में इस बात को शामिल करें कि जब भी कहीं से घर वापस लौटकर आएं तो कुछ भी साथ में लेकर जरुर आएं। खाली हाथ घर बिल्कुल भी नहीं आएं।
3.धन लक्ष्मी की वृद्घि के लिए सोमवार या फिर शुक्रवार के दिन सफेद वस्तुओं का दान करें। सफेद वस्तु दूध, चीनी, सफेद वस्त्र कुछ भी हो सकता है।
4.काली हल्दी को नकारात्मक शक्तियों को दूर करने वाला माना गया है। किसी भी दिन एक काली हल्दी लाकर पूजा स्थान में रखें। नियमित इसे धूप दीप दिखाएं। जब भी कभी धन संबंधी काम से कहीं जाएं तो इसके दर्शन करलें।
5.हर दिन काम पर जाते से कुछ धन कहीं छुपा कर रख दें। जब शाम को घर लौटें तो इस धन को किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दान कर दें। शनिवार के दिन किसी सफाइकर्मी को दान देने से भी आर्थिक बाधाएं दूर होती है।
6.शीघ्र धन प्राप्ति के लिए
“ॐ नमः कर घोर-रुपिणि स्वाहा”
विधिः उक्त मन्त्र का जप प्रातः ११ माला नित्य पूजन स्थान पर करे।
7.शुक्रवार को सवा सौ ग्राम साबुत बासमती चावल और सवा सौ ग्राम ही मिश्री को एक सफेद रुमाल में बांध कर माँ लक्ष्मी से अपनी गलतियों की क्षमा मांगते हुए उनसे अपने घर में स्थायी रूप से रहने की प्रार्थना करते हुए उसे नदी की बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें , धीरे धीरे आर्थिक पक्ष मजबूत होता जायेगा ।
8.घर के पूजा स्थल और तिजोरी में सदैव लाल कपडा बिछा कर रखें और संध्या में आपकी पत्नी या घर की कोई भी स्त्री नियम पूर्वक वहां पर ३ अगरबत्ती जला कर अवश्य ही पूजा करें ।
9.घर में तुलसी का पौधा लगाकर वहां पर संध्या के समय रोजाना घी का दीपक जलाने से माता लक्ष्मी उस घर से कभी भी नहीं जाती है ।
10.काले तिल परिवार के सभी सदस्यों के सिर पर सात बार उसार कर घर के उत्तर दिशा में फेंक दें, धनहानि बंद होगी।
ऐसे करें दीवाली पर लक्ष्मी-गणेश पूजन,
घर आएंगी सुख-समृद्धि
दीवाली पर मां लक्ष्मी, सरस्वती एवं गणेशजी की पूजा की जाती है।
इन दिन इन तीनों देवी-देवताओं की विशेष पूजा-अर्चना कर उनसे सुख-समृद्धि, बुद्धि तथा घर में शांति, तरक्की का वरदान मांगा जाता है। दीवाली पर देवी-देवताओं की पूजा में कुछ विशेष बातों का ध्यान रखा जाता है जो निम्न प्रकार हैं-
दीवाली पूजा हेतु पूजन सामग्री
दीवाली पूजा के सामान की लगभग सभी चीजें घर में ही मिल जाती हैं। कुछ अतिरिक्त चीजों को बाहर से लाया जा सकता है। ये वस्तुएं हैं- लक्ष्मी, सरस्वती व गणेश जी का चित्र या प्रतिमा, रोली, कुमकुम, चावल, पान, सुपारी, लौंग, इलायची, धूप, कपूर, अगरबत्तियां, मिट्टी तथा तांबे के दीपक, रुई, कलावा (मौलि), नारियल, शहद, दही, गंगाजल, गुड़, धनिया, फल, फूल, जौ, गेहूँ, दूर्वा, चंदन, सिंदूर, घृत, पंचामृत, दूध, मेवे, खील, बताशे, गंगाजल, यज्ञोपवीत (जनेऊ), श्वेत वस्त्र, इत्र, चौकी, कलश, कमल गट्टे की माला, शंख, आसन, थाली, चांदी का सिक्का, देवताओं के प्रसाद हेतु मिष्ठान्न (बिना वर्क का)
ये है दीवाली की पूजा विधि
दीवाली की पूजा में सबसे पहले एक चौकी पर सफेद वस्त्र बिछा कर उस पर मां लक्ष्मी, सरस्वती व गणेश जी का चित्र या प्रतिमा को विराजमान करें। इसके बाद हाथ में पूजा के जलपात्र से थोड़ा-सा जल लेकर उसे प्रतिमा के ऊपर निम्न मंत्र पढ़ते हुए छिड़कें। बाद में इसी तरह से स्वयं को तथा अपने पूजा के आसन को भी इसी तरह जल छिड़ककर पवित्र कर लें।
ऊँ अपवित्र: पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोपि वा। य: स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स: वाह्याभंतर: शुचि:।।
इसके बाद मां पृथ्वी को प्रणाम करके निम्न मंत्र बोलें तथा उनसे क्षमा प्रार्थना करते हुए अपने आसन पर विराजमान हों
पृथ्विति मंत्रस्य मेरुपृष्ठः ग ऋषिः सुतलं छन्दः कूर्मोदेवता आसने विनियोगः॥
ॐ पृथ्वी त्वया धृता लोका देवि त्वं विष्णुना धृता। त्वं च धारय मां देवि पवित्रं कुरु चासनम्॥ पृथिव्यै नमः आधारशक्तये नमः
इसके बाद "ॐ केशवाय नमः, ॐ नारायणाय नमः, ॐ माधवाय नमः" कहते हुए गंगाजल का आचमन करें
ध्यान व संकल्प विधि
इस पूरी प्रक्रिया के बाद मन को शांत कर आंखें बंद करें तथा मां को मन ही मन प्रणाम करें। इसके बाद हाथ में जल लेकर पूजा का संकल्प करें। संकल्प के लिए हाथ में अक्षत (चावल), पुष्प और जल ले लीजिए। साथ में एक रूपए (या यथासंभव धन) का सिक्का भी ले लें। इन सब को हाथ में लेकर संकल्प करें कि मैं अमुक व्यक्ति अमुक स्थान व समय पर मां लक्ष्मी, सरस्वती तथा गणेशजी की पूजा करने जा रहा हूं, जिससे मुझे शास्त्रोक्त फल प्राप्त हों।
इसके बाद सबसे पहले भगवान गणेशजी व गौरी का पूजन कीजिए। तत्पश्चात कलश पूजन करें फिर नवग्रहों का पूजन कीजिए। हाथ में अक्षत और पुष्प ले लीजिए और नवग्रह स्तोत्र बोलिए। इसके बाद भगवती षोडश मातृकाओं का पूजन किया जाता है। इन सभी के पूजन के बाद 16 मातृकाओं को गंध, अक्षत व पुष्प प्रदान करते हुए पूजन करें। पूरी प्रक्रिया मौलि लेकर गणपति, माता लक्ष्मी व सरस्वती को अर्पण कर और स्वयं के हाथ पर भी बंधवा लें। अब सभी देवी-देवताओं के तिलक लगाकर स्वयं को भी तिलक लगवाएं। इसके बाद मां महालक्ष्मी की पूजा आरंभ करें।
मां को रिझाने के लिए करें श्रीसूक्त, लक्ष्मीसूक्त व कनकधारा स्रोत का पाठ
सबसे पहले भगवान गणेशजी, लक्ष्मीजी का पूजन करें। उनकी प्रतिमा के आगे 7, 11 अथवा 21 दीपक जलाएं तथा मां को श्रृंगार सामग्री अर्पण करें। मां को भोग लगा कर उनकी आरती करें। श्रीसूक्त, लक्ष्मीसूक्त व कनकधारा स्रोत का पाठ करें। इस तरह से आपकी पूजा पूर्ण होती है।
क्षमा-प्रार्थना करें
पूजा पूर्ण होने के बाद मां से जाने-अनजाने हुए सभी भूलों के लिए क्षमा-प्रार्थना करें। उन्हें कहें-
मां न मैं आह्वान करना जानता हूँ, न विसर्जन करना। पूजा-कर्म भी मैं नहीं जानता। हे परमेश्वरि! मुझे क्षमा करो। मन्त्र, क्रिया और भक्ति से रहित जो कुछ पूजा मैंने की है, हे देवि! वह मेरी पूजा सम्पूर्ण हो। यथा-सम्भव प्राप्त उपचार-वस्तुओं से मैंने जो यह पूजन किया है, उससे आप भगवती श्रीलक्ष्मी प्रसन्न हों।
ये है दीवाली की पूजा विधि

